घर बैठे आएगा आपका ड्राइविंग लाइसेंस, नहीं लगाने होंगे विभाक के चक्कर

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ड्राइविंग लाइसेंस
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जानें क्या-क्या सुविधाएं घर बैठे मिलेंगी

नई दिल्ली। यदि आप ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण के लिए अपने नजदीकी आरटीओ कार्यालय जाने की तैयारी कर रहे हैं तो थोड़ा ठहरें, क्योंकि अब आपको वहां जाने की जरूरत नहीं है। विभाग को फोन पर संबंधित जानकारी देकर इनके कागजार घर बैठे मंगाए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि ऐसी 58 सेवाओं से जुड़े कामों के लिए अब क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) के चक्कर नहीं लगाने होंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए आधार सत्यापन को हरी झंडी दे दी है। मंत्रालय ने स्वैच्छिक तौर पर आधार सत्यापन के जरिए इन 58 सेवाओं को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया है। मंत्रालय ने शनिवार को अधिसूचना भी जारी कर दी है।

अधिसूचना के मुताबिक, इन सेवाओं को संपर्क रहित और फेसलेस तरीके से मुहैया कराया जाएगा। इससे लोगों का समय बचेगा। इससे बोझ भी कम होगा। साथ ही इससे आरटीओ कार्यालयों में भीड़ कम होगी। इससे सरकारी कामकाज में सुधार भी होगा।

इन सेवाओं में मिलेगा लाभ

ऑनलाइन मिलने वाली सेवाओं में प्रशिक्षु लाइसेंस के लिए आवेदन, प्रशिक्षु लाइसेंस में पता, नाम, फोटो, तस्वीर बदलना, डुप्लीकेट प्रशिक्षु लाइसेंस जारी करना, प्रशिक्षु लाइसेंस निकलवाने के लिए प्रावधान आदि शामिल हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट जारी करने, कंडक्टर लाइसेंस में पता बदलवाने जैसे कामों के लिए भी आरटीओ कार्यालय जाने की जरूरत नहीं है।

आधार नहीं होने पर क्या करें?

अधिसूचना के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति के पास आधार नंबर नहीं है, तो तो वह दस्तावेजी फॉर्म भरकर इन सेवाओं का फायदा उठा सकते हैं। इसके लिए उन्हें सीएमवीआर, 1989 के तहत वैकल्पिक दस्तावेज प्रत्यक्ष जमा कराना होगा।

व्यापार प्रमाण पत्र की वैधता बढ़ाई

मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के तहत व्यापार प्रमाण पत्र व्यवस्था को सरल बनाने और सुव्यवस्थित करने के लिए नए नियमों को अधिसूचित किया है। इसे कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नए नियमों के तहत व्यापार प्रमाण पत्र की वैधता को एक साल से बढ़ाकर पांच साल कर दिया है। मौजूदा नियमों में कुछ खामियों के चलते कई मामलों में व्यापार प्रमाण पत्र की प्रासंगिकता की भिन्न भिन्न व्याख्या होने से कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

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