राजस्थान में छोटे कारोबारियों का कर्ज 20% की रफ्तार से बढ़ा
राजस्थान में माइक्रो बिजनेस का क्रेडिट मार्केट जून 2026 तक 2.01 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। पिछले तीन साल में व्यक्तिगत तौर पर कारोबार के लिए लिए गए कर्ज में 20 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर्ज हुई, जबकि एंटरप्राइज कर्ज 13 प्रतिशत की दर से बढ़ा। करीब 31.2 लाख उद्यमियों ने अब तक औपचारिक एंटरप्राइज कर्ज नहीं लिया है।
- राजस्थान का माइक्रो बिजनेस क्रेडिट मार्केट जून 2026 तक 2.01 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचा।
- व्यक्तिगत बिजनेस कर्ज में 20% CAGR से बढ़ोतरी, जबकि एंटरप्राइज कर्ज की वृद्धि दर 13% रही।
- 31.2 लाख उद्यमियों के लिए अवसर: इनमें 65% का सिबिल स्कोर 730 से अधिक है।
Rajasthan’s Micro Business Credit Market Reaches ₹2.01 Lakh Crore : राजस्थान में छोटे कारोबारियों के लिए कर्ज लेने का तरीका बदल रहा है। कारोबार से जुड़ी जरूरतों के लिए व्यक्तिगत तौर पर लिए जाने वाले कर्ज में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। जून 2026 तक राज्य का माइक्रो बिजनेस क्रेडिट मार्केट 2.01 लाख करोड़ रुपये के बकाया कर्ज तक पहुंच गया। पिछले तीन साल में व्यक्तिगत बिजनेस कर्ज 20 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़ा, जबकि एंटरप्राइज स्तर पर कर्ज की वृद्धि दर 13 प्रतिशत रही।
ट्रांसयूनियन सिबिल और नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (NSIC) की संयुक्त रिपोर्ट भारत के माइक्रो बिजनेस उद्यमी: विकास, बदलाव और उभरते मौके में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में मार्च 2026 तक करीब 31.2 लाख ऐसे व्यक्तिगत उद्यमी थे, जिन्होंने कभी एंटरप्राइज के तौर पर कर्ज नहीं लिया था। इनमें से लगभग 65 प्रतिशत का सिबिल स्कोर 730 से अधिक था। इससे संकेत मिलता है कि अच्छे क्रेडिट रिकॉर्ड वाले कई कारोबारियों तक औपचारिक बिजनेस फाइनेंसिंग पहुंचाने की गुंजाइश मौजूद है।
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राजस्थान में छोटे कारोबारों की कर्ज जरूरतों में व्यापार, मैन्युफैक्चरिंग और परिवहन क्षेत्र की बड़ी हिस्सेदारी है। माइक्रो बिजनेस के कुल बकाया कर्ज में व्यापार का हिस्सा 39 प्रतिशत और मैन्युफैक्चरिंग का 20 प्रतिशत है। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग से जुड़े कर्ज में पिछले तीन साल के दौरान 17 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि दर्ज की गई।
फाइनेंसिंग के प्रमुख विकल्पों में प्रॉपर्टी के बदले लिया जाने वाला लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी (LAP) सबसे आगे है। राज्य के माइक्रो बिजनेस बकाया कर्ज में इसकी हिस्सेदारी 35 प्रतिशत है, जबकि कमर्शियल व्हीकल लोन की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है। व्यक्तिगत बिजनेस कर्जदारों को फाइनेंस उपलब्ध कराने में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) की हिस्सेदारी करीब 39 प्रतिशत बताई गई है।
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रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तक देशभर के माइक्रो बिजनेस उद्यमियों पर कुल 29.6 लाख करोड़ रुपये का कमर्शियल कर्ज बकाया था। इसमें 19.1 लाख करोड़ रुपये व्यक्तिगत तौर पर कारोबार के लिए कर्ज लेने वालों और 10.5 लाख करोड़ रुपये माइक्रो बिजनेस के नाम पर लिए गए कर्ज से जुड़े थे। पिछले तीन साल में व्यक्तिगत बिजनेस कर्ज 21 प्रतिशत CAGR से बढ़ा, जबकि माइक्रो बिजनेस कर्ज में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
देशभर में मार्च 2026 तक करीब 3.9 करोड़ व्यक्तिगत बिजनेस कर्जदार ऐसे थे, जिन्होंने एंटरप्राइज के रूप में कभी कर्ज नहीं लिया था। इनमें 63 प्रतिशत का सिबिल स्कोर 730 से अधिक था और 54 प्रतिशत को बिजनेस कर्ज लेने का दो साल या उससे ज्यादा का अनुभव था।



