पंचायत चुनाव का दूसरा चरण कल : 22 जिलों में 532 वार्डों पर होगी वोटिंग, कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर

राजस्थान में पंचायती राज चुनाव के दूसरे चरण में बुधवार को 22 जिलों में मतदान होगा। जिला परिषद के 532 और पंचायत समितियों के 2,197 वार्डों के लिए मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनेंगे। इस चरण में कई राजनीतिक परिवारों की साख भी दांव पर है। नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा के परिजनों के चुनावी भविष्य पर भी सबकी नजरें टिकी हैं।

  • राजस्थान पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में बुधवार को 22 जिलों में मतदान।
  • जिला परिषद और पंचायत समिति के कुल 2,729 वार्डों में वोट डाले जाएंगे।
  • मंत्री झाबर सिंह खर्रा के परिवार के कई सदस्यों की चुनावी किस्मत का होगा फैसला।

Second phase of panchayat elections tomorrow : राजस्थान में पंचायती राज चुनाव के दूसरे चरण के लिए बुधवार, 28 अक्टूबर को मतदान होगा। प्रदेश के 22 जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इस चरण में जिला परिषद के 532 वार्ड और 124 पंचायत समितियों के 2,197 वार्ड शामिल हैं। कुल 2,729 वार्डों में होने वाला यह चुनाव ग्रामीण क्षेत्रों की राजनीतिक दिशा तय करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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इस चुनाव में सिर्फ राजनीतिक दलों की ताकत ही नहीं, बल्कि कई प्रभावशाली नेताओं और उनके परिवारों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। खास तौर पर नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा के परिवार के सदस्यों के चुनावी प्रदर्शन पर नजर रहेगी। उनकी पत्नी शांति देवी खर्रा, बड़े बेटे दुर्गा सिंह खर्रा, छोटे बेटे अजय सिंह खर्रा और छोटे भाई महावीर सिंह खर्रा की पत्नी प्रतिमा खर्रा चुनाव मैदान में हैं। मतदाताओं का फैसला इन प्रत्याशियों के साथ उनके परिवार की राजनीतिक साख के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जिला परिषद और पंचायत समिति के प्रतिनिधि ग्रामीण विकास, स्थानीय सुविधाओं और लोगों की समस्याओं से जुड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाते हैं। इसी वजह से गांवों में होने वाला यह चुनाव स्थानीय जरूरतों के साथ-साथ राजनीतिक दलों के ग्रामीण जनाधार का भी संकेत देगा। चुनावी नतीजों से यह स्पष्ट होगा कि किन प्रत्याशियों को जनता का समर्थन मिला और किन क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरण बदले हैं।

मतदान के बाद जीत-हार के आंकड़ों पर राजनीतिक दलों की निगाहें रहेंगी। जिन क्षेत्रों में मुकाबला करीबी होगा, वहां विजयी प्रत्याशियों को एकजुट रखने की रणनीति भी सामने आ सकती है। पंचायतों और स्थानीय निकायों में बहुमत जुटाने के लिए संभावित बाड़ेबंदी की चर्चाएं भी तेज हो सकती हैं। हालांकि, ऐसी कोई कवायद कहां और कब होगी, यह चुनाव परिणाम और संबंधित क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

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अब दूसरे चरण में मतदाताओं के फैसले का इंतजार है। बुधवार को पड़ने वाले वोट न केवल प्रत्याशियों की किस्मत तय करेंगे, बल्कि ग्रामीण राजनीति में अलग-अलग दलों और परिवारों की स्थिति का भी संकेत देंगे।

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