अब घर बैठे एक क्लिक पर होगा जमीन का कन्वर्जन, भजनलाल सरकार के नए नियमों से खत्म हुए पटवारी-दफ्तरों के चक्कर
राजस्थान में कृषि भूमि को आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक उपयोग में बदलने की प्रक्रिया अब पहले से आसान होगी। भजनलाल सरकार ने भूमि रूपांतरण के लिए नए नियम लागू किए हैं। इनके तहत ऑनलाइन आवेदन करने पर उसी दिन स्वतः अनुमति आदेश जारी होगा। नई व्यवस्था में प्रीमियम भुगतान, दस्तावेजों की जांच और राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव की प्रक्रिया भी तय की गई है।
- राजस्थान भू-राजस्व नियम 2026 के तहत अब कृषि भूमि का गैर-कृषि कार्यों के लिए कन्वर्जन होगा बेहद आसान।
- ऑनलाइन आवेदन करने पर बिना किसी देरी के तय प्रक्रिया के तहत तुरंत मिलेगी डिजिटल मंजूरी।
- 500 वर्गमीटर तक जमीन पर मकान या पशुशाला बनाने पर किसी प्रकार का प्रीमियम नहीं देना होगा।
Now, land conversion can be done from home with just a single click : राजस्थान में कृषि भूमि का उपयोग बदलवाने के लिए अब लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलने वाली है। राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि को गैर-कृषि कार्यों के लिए रूपांतरित करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत आवेदन ऑनलाइन किया जा सकेगा और आवेदन वाले दिन ही सिस्टम के माध्यम से स्वतः अनुमति आदेश जारी हो जाएगा।
राज्य सरकार ने राजस्थान भू-राजस्व (ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि का गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। ये नियम 2 नवंबर से प्रभावी होंगे। इनके लागू होने के साथ ही वर्ष 2007 में बनाए गए पुराने नियम समाप्त हो जाएंगे। सरकार का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाना है।
14 तरह के कामों के लिए बदल सकेंगे भूमि का उपयोग
नए प्रावधानों के तहत कृषि भूमि को 14 प्रकार के गैर-कृषि कार्यों के लिए उपयोग में लिया जा सकेगा। इनमें आवासीय कॉलोनी, व्यावसायिक गतिविधियां, औद्योगिक इकाइयां, संस्थागत उपयोग, पर्यटन परियोजनाएं, चिकित्सा सुविधाएं, खेल परिसर, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां और सौर एवं पवन ऊर्जा परियोजनाएं शामिल हैं।
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आवेदन के दिन ही मिलेगा अनुमति आदेश
नई व्यवस्था में भूमि रूपांतरण के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन जमा करना होगा। निर्धारित दस्तावेज अपलोड करने के साथ ही प्रीमियम की राशि भी जमा करनी होगी। इसकी गणना कंप्यूटर आधारित प्रणाली से होगी।
आवेदन शुल्क आवासीय उपयोग के लिए 2,000 रुपये और अन्य प्रयोजनों के लिए 20,000 रुपये तय किया गया है। यह शुल्क वापस नहीं किया जाएगा। आवेदन पूरा होने पर उसी दिन पोर्टल से स्वतः अनुमति आदेश जारी हो जाएगा।
अब सभी प्रकार के भूमि रूपांतरण के मामलों में उपखंड अधिकारी को अनुमति देने का अधिकार होगा। आवेदन मिलने के बाद अधिकारी एक महीने के भीतर दस्तावेजों और अन्य तथ्यों की जांच करेंगे। यदि दस्तावेज सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार अनुमति जारी रहेगी। यदि 30 दिन के भीतर अधिकारी की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तो ऑनलाइन पोर्टल पर राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण और भूमि की श्रेणी में बदलाव स्वतः हो जाएगा। इस 30 दिन की अवधि में संबंधित भूमि किसी तीसरे व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं की जा सकेगी।
इन मामलों में मिलेगी प्रीमियम से छूट
नए नियमों में आम खातेदारों और कुछ विशेष परियोजनाओं को राहत भी दी गई है। खातेदार अपनी अधिकतम 500 वर्गमीटर जमीन पर स्वयं का आवास या पशुशाला बनाता है तो उसे प्रीमियम नहीं देना होगा।
इसके अलावा स्टेडियम, खेल मैदान, पर्यटन इकाइयों, सरकारी कार्यालयों, पात्र कृषि प्रसंस्करण इकाइयों और सामाजिक एवं धार्मिक धर्मार्थ संस्थाओं को निर्धारित शर्तों के अनुसार छूट मिलेगी। कुछ औद्योगिक इकाइयों को सरकारी योजनाओं के तहत प्रीमियम में 50 से 75 प्रतिशत तक राहत देने का प्रावधान भी किया गया है।
इन जमीनों का नहीं हो सकेगा रूपांतरण
सरकार ने पर्यावरण और सार्वजनिक उपयोग से जुड़ी जमीनों को लेकर स्पष्ट प्रतिबंध रखे हैं। अवाप्ति की प्रक्रिया वाली भूमि, सरकारी प्रतिबंधित क्षेत्र, नदी-नाले, तालाब, जलस्रोत, सार्वजनिक रास्ते, श्मशान और कब्रिस्तान की जमीन का रूपांतरण नहीं किया जा सकेगा।
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इसके अलावा पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों और राजमार्गों, रेलवे लाइनों सहित अन्य संरक्षित स्थानों की निर्धारित सीमा में आने वाली जमीन पर भी रूपांतरण की अनुमति नहीं मिलेगी।
रूपांतरण के बाद भी लेनी होगी निर्माण की मंजूरी
कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग में बदलने की अनुमति मिल जाने का मतलब यह नहीं होगा कि वहां तत्काल निर्माण शुरू किया जा सकेगा। भवन निर्माण और ले-आउट के लिए अलग से स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। यह मंजूरी जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति की ओर से निर्धारित प्रक्रिया के तहत दी जाएगी।
आवासीय कॉलोनियों और एकीकृत टाउनशिप में कुल भूमि का 40 प्रतिशत हिस्सा सड़क और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित रखना होगा। परियोजना स्थल तक कम से कम 30 फुट चौड़ा पहुंच मार्ग भी जरूरी होगा। 300 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंडों में वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था करनी होगी।
वहीं, 500 वर्गमीटर या इससे अधिक क्षेत्रफल के मामलों में भवन मानचित्र की स्वीकृति अनिवार्य रहेगी। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार 60 दिन में भवन मानचित्र को मंजूरी देनी होगी। देरी होने पर आवेदक 30 दिन का नोटिस दे सकेगा। इसके बाद भी निर्णय नहीं होने पर नियमानुसार स्वीकृति स्वतः मानी जाएगी।
गलत दस्तावेज देने पर दोगुना जुर्माना
सरकार ने ऑनलाइन प्रक्रिया के साथ जांच और जवाबदेही का प्रावधान भी रखा है। उपखंड अधिकारी स्वयं या भू-अभिलेख निरीक्षक अथवा उससे उच्च स्तर के अधिकारी के माध्यम से जमीन का भौतिक सत्यापन करवा सकेंगे।
यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी देता है, जरूरी तथ्य छिपाता है या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अनुमति हासिल करता है तो सुनवाई का अवसर देने के बाद अनुमति निरस्त की जा सकेगी। साथ ही संबंधित व्यक्ति पर जमा किए जाने वाले प्रीमियम की दोगुनी राशि के बराबर जुर्माना लगाया जा सकेगा।
बिना अनुमति उपयोग करने पर चार गुना जुर्माना
कृषि भूमि का बिना रूपांतरण अनुमति आवासीय, व्यावसायिक या किसी अन्य गैर-कृषि कार्य में इस्तेमाल करना भारी पड़ सकता है। ऐसे मामलों में निर्धारित प्रीमियम का चार गुना जुर्माना वसूला जाएगा।
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इस तरह की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पटवारी को साल में कम से कम दो बार अपने क्षेत्र का सर्वे करना होगा। सर्वे के बाद अनियमितताओं की रिपोर्ट उपखंड अधिकारी को सौंपनी होगी।
आदेश के खिलाफ 30 दिन में कर सकेंगे अपील
भूमि रूपांतरण से जुड़े किसी आदेश से असंतुष्ट व्यक्ति को अपील का अधिकार भी दिया गया है। संबंधित व्यक्ति आदेश के 30 दिन के भीतर जिला कलेक्टर के समक्ष अपील कर सकेगा। अपील का निस्तारण 60 दिन में करना होगा।
नई व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन के उपयोग में बदलाव की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। ऑनलाइन आवेदन, स्वतः अनुमति और समयबद्ध जांच के प्रावधानों से आम लोगों को राहत मिलेगी। साथ ही नियमों के उल्लंघन पर सख्ती से अवैध रूपांतरण और अनधिकृत निर्माण पर अंकुश लगाने की कोशिश की गई है।



