पंचायत चुनाव से पहले आरक्षण की लॉटरी, बदल गए गांवों के समीकरण
राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले आरक्षण की लॉटरी ने कई दावेदारों की तैयारियों का रुख बदल दिया है। जयपुर समेत जिलों में पंचायत समिति प्रधान, जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के पदों का आरक्षण तय हो रहा है। रोटेशन के चलते कुछ सीटें सामान्य तो कुछ आरक्षित हुई हैं। महिलाओं के लिए भी 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू रहेगा।
- आरक्षण की लॉटरी से पंचायत चुनाव में कई सीटों का गणित बदला।
- जयपुर जिला परिषद के 57 वार्डों में 28 महिलाओं के लिए आरक्षित।
- पंचायत समिति प्रधान के पदों पर भी आरक्षण और रोटेशन का असर।
Rajasthan Panchayat Polls: राजस्थान में आगामी पंचायतीराज चुनाव को लेकर गांवों में राजनीतिक हलचल बढ़ने लगी है। आरक्षण की लॉटरी के बाद अब संभावित उम्मीदवारों के सामने अपने क्षेत्र और चुनावी रणनीति को लेकर नई स्थिति बन गई है।
जयपुर जिले में जिला परिषद के 57 वार्डों का आरक्षण तय किया गया है। इनमें अनुसूचित जाति के 10, अनुसूचित जनजाति के 8 और अन्य पिछड़ा वर्ग के 10 वार्ड शामिल हैं। बाकी 29 वार्ड सामान्य श्रेणी में रखे गए हैं। कुल 57 वार्डों में से 28 महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
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महिला आरक्षण का वितरण अलग-अलग श्रेणियों में किया गया है। अनुसूचित जाति के महिला आरक्षित वार्डों में 42, 36, 23, 32 और 27 शामिल हैं। अनुसूचित जनजाति में 47, 41, 46 और 44 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। ओबीसी में 43, 8, 1, 51 और 10 वार्ड महिला आरक्षित हैं। सामान्य श्रेणी में भी 14 वार्ड महिलाओं के लिए रखे गए हैं, जबकि 15 वार्ड सामान्य वर्ग के लिए हैं।
जयपुर की 22 पंचायत समितियों के प्रधान पदों का आरक्षण भी सामने आ गया है। इनमें 4 पद अनुसूचित जाति, 3 अनुसूचित जनजाति, 4 अन्य पिछड़ा वर्ग और 11 पद सामान्य श्रेणी के लिए तय किए गए हैं।
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प्रदेश स्तर पर 457 पंचायत समितियों के प्रधान पदों के साथ 1403 जिला परिषद सदस्यों और 8245 पंचायत समिति सदस्यों के पदों का आरक्षण भी निर्धारित किया जा रहा है। सभी श्रेणियों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान रहेगा।
प्रधान पदों की बात करें तो अनुसूचित जाति के 79, अनुसूचित जनजाति के 93 और अन्य पिछड़ा वर्ग के 56 पद आरक्षित होंगे। आरक्षण की निर्धारित सीमा के चलते ओबीसी श्रेणी में कुछ बदलाव की संभावना भी बनी हुई है। करीब 228 से 229 प्रधान पद सामान्य श्रेणी में रह सकते हैं।
आरक्षण रोटेशन के आधार पर किए जाने से इस बार चुनावी समीकरण काफी हद तक बदल सकते हैं। पिछली बार आरक्षित रही सीट इस बार सामान्य हो सकती है, जबकि सामान्य सीट आरक्षित श्रेणी में जा सकती है। यही वजह है कि लंबे समय से तैयारी कर रहे कई दावेदार अब नए आरक्षण के हिसाब से अपना क्षेत्र और रणनीति बदलने में जुटे हैं।



