यूएन में ‘तबाही’ की धमकी, फिर 3 घंटे की सीक्रेट मीटिंग… ट्रंप और ईरान के बीच आखिर पक क्या रहा है
संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान को दुनिया के सामने खुलेआम 'तबाही' की चेतावनी देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर अचानक बदल गए हैं। धमकी के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने ईरान के शीर्ष नेताओं के साथ तीन घंटे तक चली एक 'बेहद अच्छी' और रहस्यमयी बैठक का दावा करके पूरी दुनिया को चौंका दिया है।
- 👉 तबाही की धमकी से यू-टर्न: यूएन (UNGA) में सरेआम ईरान को तबाह करने की चेतावनी देने के चंद घंटों बाद ही ट्रंप के सुर नरम पड़ गए।
- 👉 3 घंटे की सीक्रेट मीटिंग: ट्रंप ने दावा किया कि उनकी और ईरानी नेताओं के बीच 3 घंटे तक बहुत सकारात्मक और गुप्त मुलाकात हुई है।
- 👉 क्या पर्दे के पीछे हो रही है डील? इस अहम मीटिंग में अमेरिकी दामाद जेरेड कुशनर भी मौजूद थे, दुनिया की नजरें अब ईरान और अमेरिका के अगले कदम पर हैं।
Trump’s U-Turn: From ‘Destruction’ Threats to a 3-Hour ‘Secret’ Meeting with Iran: कूटनीति की दुनिया भी कितनी अजीब है! जो देश एक-दूसरे को सरेआम मिटाने की कसमें खा रहे हों, वही बंद कमरों में घंटों गुफ्तगू करते नजर आएं। कुछ ऐसा ही हाई-वोल्टेज ड्रामा न्यूयॉर्क में चल रहे संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान देखने को मिला है। अमेरिका और ईरान के बीच अचानक एक ऐसा हैरान करने वाला मोड़ आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों को भी सोच में डाल दिया है।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि मंगलवार को अमेरिका और ईरान के उच्चाधिकारियों के बीच लगभग तीन घंटे तक बहुत ही शानदार और उपयोगी बातचीत हुई। यह दावा इसलिए भी दुनिया को पच नहीं रहा है, क्योंकि इससे कुछ ही घंटे पहले ट्रंप ने इसी यूएन के मंच से गरजते हुए ईरान को सरेआम धमकी दी थी।
न्यूयॉर्क पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति, क्या होगी आमने-सामने की मुलाकात? इस रहस्यमयी मीटिंग के दावों के बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान भी यूएन महासभा में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क पहुंच चुके हैं। तेहरान से उड़ान भरने से पहले उन्होंने साफ कर दिया था कि वे इस वैश्विक मंच का इस्तेमाल ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अपनी क्षेत्रीय नीतियों का मजबूती से बचाव करने के लिए करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वे ईरानी राष्ट्रपति से सीधे मिलेंगे, तो उन्होंने साफ इंकार नहीं किया। उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि ‘शायद ऐसा हो सकता है’।
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बंद कमरे में कौन-कौन था मौजूद? इस हाई-प्रोफाइल और गुप्त बैठक को लेकर ट्रंप ने अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं। उन्होंने यह तो बताया कि बातचीत “बेहद उपयोगी” रही और “आगे देखते हैं क्या होता है”, लेकिन ईरान की तरफ से किन नेताओं ने हिस्सा लिया, इस पर उन्होंने चुप्पी साध ली। हालांकि, अमेरिकी खेमे से इस बैठक में ट्रंप के साथ उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर (पूर्व वरिष्ठ सलाहकार) मौजूद थे। मीटिंग से बाहर आने के बाद विटकॉफ ने भी बस इतना ही कहा कि “फिलहाल सब बहुत अच्छा लग रहा है।”
कुछ घंटे पहले ही दी थी ‘तबाह’ करने की चेतावनी यह पूरा घटनाक्रम किसी हॉलीवुड थ्रिलर से कम नहीं है। मीटिंग से ठीक पहले यूएन के मंच पर ट्रंप ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा था कि अमेरिका के पास केवल दो ही रास्ते बचे हैं— या तो ईरान कोई पक्का समझौता करे, या फिर पूरी तरह से ‘तबाह’ होने के लिए तैयार रहे। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जो ट्रंप कुछ घंटे पहले तबाही की बात कर रहे थे, वो अचानक ‘सकारात्मक बातचीत’ के कसीदे क्यों पढ़ने लगे? क्या पर्दे के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच कोई बड़ी डील होने जा रही है?



