निकाय नतीजों पर BJP का दावा, निर्दलीयों को लेकर कही बड़ी बात

भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और राजस्थान निकाय प्रभारी हरीश द्विवेदी ने निकाय चुनाव के बाद पार्टी की रणनीति पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि भाजपा किसी निर्दलीय के पास समर्थन मांगने नहीं गई, बल्कि निर्दलीय खुद पार्टी के संपर्क में आए। उनका दावा है कि कई निर्दलीय पहले भाजपा से जुड़े थे और टिकट नहीं मिलने पर चुनाव लड़े थे, फिर वापस पार्टी में लौटे।

  • निर्दलीय प्रत्याशी खुद भाजपा के पास आए, कांग्रेस के दबाव बनाने के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद : हरीश द्विवेदी।
  • निकाय चुनाव में जीत के बाद अब पंचायत चुनाव में एक बार कांग्रेस-एक बार भाजपा की परंपरा तोड़ने का दावा।
  • 22 प्रतिशत चुनाव जीतने वाले निर्दलीयों में से 15 प्रतिशत से अधिक भाजपा के ही कार्यकर्ता थे : भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री।

BJP’s claim regarding civic body election results : राजस्थान के निकाय चुनावों के बाद बोर्ड गठन और निर्दलीय पार्षदों के समर्थन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भाजपा ने अपना पक्ष रखा है। पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और राजस्थान निकाय चुनाव प्रभारी हरीश द्विवेदी ने कहा कि भाजपा किसी निर्दलीय के पास समर्थन लेने नहीं गई। उनके मुताबिक, निर्दलीय खुद भाजपा के संपर्क में आए।

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हरीश द्विवेदी ने कहा कि निकाय चुनाव स्थानीय मुद्दों पर आधारित होते हैं और इनमें अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में उतरते हैं। उन्होंने दावा किया कि करीब 22 प्रतिशत निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीतकर आए और इनमें 15 प्रतिशत से ज्यादा ऐसे लोग हैं, जो पहले भाजपा के कार्यकर्ता रहे हैं।

उनके अनुसार, इनमें से कई लोगों को किसी कारण से पार्टी का टिकट नहीं मिला था। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा, जीत हासिल की और बाद में फिर भाजपा में लौट आए। द्विवेदी ने इसे पार्टी के साथ पहले से जुड़े कार्यकर्ताओं की वापसी के तौर पर बताया।

निकाय चुनाव के आंकड़ों को लेकर उन्होंने कहा कि भाजपा ने करीब 42 प्रतिशत सीटों पर जीत हासिल की है। उनका तर्क था कि स्थानीय निकाय चुनाव में किसी एक दल को 50 प्रतिशत सीटें मिलना ही बहुमत का एकमात्र आधार नहीं है। अगर चुनाव में कई दल मैदान में हों, तो सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाला दल बोर्ड बनाने की स्थिति में आ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा और उसके समर्थित उम्मीदवारों को मिलाकर 55 प्रतिशत से अधिक सीटों पर जीत मिली है। द्विवेदी ने दावा किया कि पिछले चुनावों के आंकड़ों से तुलना करने पर भाजपा के प्रदर्शन को व्यापक स्तर पर देखा जा सकता है।

निकाय चुनाव के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर सत्ता और सरकारी तंत्र के कथित इस्तेमाल का आरोप लगाया था। कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया कि निर्दलीय पार्षदों पर दबाव बनाकर भाजपा ने कई निकायों में बोर्ड बनाए। इन आरोपों पर द्विवेदी ने कहा कि भाजपा ने किसी निर्दलीय से संपर्क कर समर्थन नहीं मांगा, बल्कि चुनाव जीतने वाले निर्दलीय खुद पार्टी के पास आए।

गौरतलब है कि निकाय चुनाव में भाजपा करीब 40.84 प्रतिशत वार्ड जीतने में सफल रही थी, जबकि कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों का भी उल्लेखनीय प्रदर्शन रहा। इसके बावजूद भाजपा बड़ी संख्या में निकायों में बोर्ड बनाने में कामयाब रही।

पंचायत चुनाव को लेकर भी द्विवेदी ने पार्टी की रणनीति का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में लंबे समय से पंचायत चुनावों में कभी एक दल और कभी दूसरे दल के पक्ष में जाने की जो परंपरा रही है, उसे इस बार बदलने का प्रयास किया जाएगा।

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द्विवेदी ने निकाय चुनाव के परिणामों को केंद्र की मोदी सरकार के 12 साल और राजस्थान की भाजपा सरकार के ढाई साल के कामकाज से भी जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों में जनता के समर्थन की झलक दिखाई देती है।

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