‘समुद्र मंथन’ ने छुआ मन

जयपुर में श्री रामजी लाल स्वर्णकार की 23वीं पुण्य तिथि पर आयोजित स्मृति समारोह में NSD रेपर्टरी कंपनी ने ‘समुद्र मंथन’ का मंचन किया। पौराणिक कथा के जरिए जीवन के संघर्ष, आत्ममंथन, विकास के साथ बढ़ती चुनौतियों और जिम्मेदारी का संदेश दिया गया। प्रस्तुति में 100 से अधिक कलाकारों ने अभिनय, संगीत, नृत्य और आधुनिक रंग तकनीक से दर्शकों को प्रभावित किया।

  • समुद्र मंथन: जयपुर में NSD रेपर्टरी कंपनी की प्रभावशाली प्रस्तुति।
  • रामजी लाल स्वर्णकार: 23वीं पुण्य तिथि पर विशेष स्मृति समारोह।
  • आत्ममंथन: पौराणिक कथा के जरिए आधुनिक जीवन का संदेश।

Samudra Manthan Staged in Jaipur : श्री रामजी लाल स्वर्णकार की 23वीं पुण्य तिथि पर महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के आर.एल. स्वर्णकार ऑडिटोरियम में विशेष स्मृति समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की रेपर्टरी कंपनी ने ‘समुद्र मंथन’ का मंचन किया।

‘समुद्र मंथन’ ने छुआ मन
Image Source : Via Dainik Jaltedeep

नाटक ने पौराणिक प्रसंगों को आज के जीवन से जोड़ते हुए दर्शकों को सोचने का अवसर दिया। देवासुर संग्राम, अमृत की तलाश और हलाहल विष के प्रसंगों के माध्यम से विकास, तकनीक, प्रदूषण, तनाव और सामाजिक असंतुलन जैसे मुद्दों को मंच पर उभारा गया।

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निर्देशक एवं रंगकर्मी चित्तरंजन त्रिपाठी के निर्देशन में हुई इस प्रस्तुति का खास पहलू यह रहा कि ‘समुद्र मंथन’ को केवल धार्मिक-पौराणिक कथा के रूप में नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर चलने वाले संघर्ष और आत्ममंथन के प्रतीक के तौर पर पेश किया गया। प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि जीवन की उपलब्धियों के साथ आने वाली चुनौतियों की जिम्मेदारी भी मनुष्य को स्वीकार करनी होती है।

‘समुद्र मंथन’ ने छुआ मन
Image Source : Via Dainik Jaltedeep

समारोह की शुरुआत रामजी लाल स्वर्णकार और गोमती देवी स्वर्णकार के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। संस्थापक चेयरमैन डॉ. एम.एल. स्वर्णकार ने कहा कि माता-पिता के दिए संस्कार जब अगली पीढ़ी के व्यवहार में दिखाई देते हैं, तो वही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

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आसिफ अली हैदर की रचना को ऑडियो-विजुअल तकनीक, मंच सज्जा, संगीत, नृत्य और प्रकाश संयोजन के साथ भव्य रूप दिया गया। प्रस्तुति में 100 से अधिक कलाकार शामिल रहे। अभिनय और मंच संयोजन पर दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।

कार्यक्रम में डॉ. विकास चन्द्र स्वर्णकार, मीना स्वर्णकार, हरमन स्वर्णकार, आर.आर. सोनी, वंदना सोनी, डॉ. शोभित स्वर्णकार, जयाश्री, डॉ. अचल गुलाटी, डॉ. प्रदीप पाइन और डॉ. सुधीर सचदेव सहित परिवारजन, चिकित्सक, प्रशासनिक एवं न्यायिक अधिकारी और कला जगत से जुड़े लोग मौजूद रहे। समापन पर रात्रिभोज का आयोजन किया गया।

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