ओडिशा में बदलाव की नई तस्वीर, महिलाओं से निवेश तक कई मोर्चों पर जोर
ओडिशा में महिला सशक्तिकरण, स्वयं सहायता समूह, बाल कल्याण, पर्यटन और औद्योगिक निवेश को लेकर कई योजनाएं और परियोजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिडा के विभागों से जुड़े कार्यक्रमों के साथ राज्य सरकार का फोकस महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, बुनियादी ढांचे, पर्यटन सुविधाओं और निवेश प्रस्तावों को गति देने पर है।
- महिला सशक्तिकरण: मिशन शक्ति के करीब 6 लाख SHG से लगभग 70 लाख महिलाएं जुड़ी हैं।
- सुभद्रा योजना: पात्र महिलाओं के लिए पांच वर्षों में ₹50,000 सहायता का प्रावधान।
- ओडिशा निवेश और पर्यटन: औद्योगिक परियोजनाओं और नए पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर।
(दीपक मेहता)
Odisha’s New Development Push : ओडिशा में महिला सशक्तिकरण से लेकर औद्योगिक निवेश और पर्यटन विकास तक कई मोर्चों पर सरकार की योजनाएं आगे बढ़ रही हैं। उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिडा के पास महिला एवं बाल विकास, मिशन शक्ति और पर्यटन जैसे विभागों की जिम्मेदारी है। ऐसे में उनके विभागों से जुड़ी पहलों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और सामाजिक बुनियादी ढांचे को खास जगह मिल रही है।
इन पहलों में सबसे बड़ा आधार मिशन शक्ति का स्वयं सहायता समूह नेटवर्क है। ओडिशा सरकार के अनुसार, करीब 6 लाख महिला स्वयं सहायता समूहों से लगभग 70 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन समूहों को केवल बचत और ऋण तक सीमित रखने के बजाय खेती, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, बांस उत्पाद, पशुपालन और दूसरे आय-सृजन वाले कामों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
सुभद्रा योजना से वित्तीय भागीदारी पर जोर

महिला आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में सुभद्रा योजना सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है। ओडिशा आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक, 21 से 60 वर्ष की पात्र महिलाओं को पांच वर्षों में कुल ₹50,000 की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है। सर्वेक्षण में योजना का उद्देश्य महिलाओं की वित्तीय स्वायत्तता और उत्पादक संपत्ति निर्माण को बढ़ावा देना बताया गया है।
मार्च 2026 में राज्य सरकार ने योजना की चौथी किस्त के तहत एक करोड़ से अधिक लाभार्थियों को ₹5,000 की सहायता दिए जाने की जानकारी दी थी।
महिला स्वयं सहायता समूहों के स्तर पर बैंक लिंकेज और ब्याज सहायता भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मिशन शक्ति के आधिकारिक पोर्टल के मुताबिक, समूहों को आजीविका और उद्यमिता से जोड़ने के लिए वित्तीय सहायता और क्षमता निर्माण पर काम किया जा रहा है।
बच्चों के लिए 1,889 नए आंगनवाड़ी केंद्र
महिला सशक्तिकरण के साथ बाल देखभाल के बुनियादी ढांचे पर भी जोर दिया गया है। अप्रैल 2026 में प्रभाती परिडा ने राज्य के सभी 30 जिलों में 1,889 नए आंगनवाड़ी केंद्रों का वर्चुअल उद्घाटन किया। सरकार ने इन केंद्रों को बच्चों और माताओं के लिए बेहतर तथा मजबूत सुविधाओं से जोड़ने की बात कही है।
इन केंद्रों के जरिए शुरुआती बाल देखभाल, पोषण और शिक्षा से जुड़ी सेवाओं को मजबूत करने की कोशिश है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने 2026 में मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।
रोजगार और निवेश की तस्वीर भी महत्वपूर्ण
ओडिशा की विकास रणनीति में उद्योग और निवेश को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। जून 2026 में राज्य की हाई-लेवल क्लियरेंस अथॉरिटी ने नौ जिलों में 20 औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी दी। इन प्रस्तावों का कुल निवेश करीब ₹76,612 करोड़ और संभावित रोजगार 50,517 बताया गया।
इन परियोजनाओं में ग्रीन एनर्जी, सोलर मैन्युफैक्चरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, स्टील, रेयर अर्थ आधारित उत्पाद और अन्य उभरते क्षेत्र शामिल हैं। हालांकि, ये मंजूर किए गए निवेश प्रस्ताव और अनुमानित रोजगार हैं। इन्हें पहले से सृजित निवेश या वास्तविक रोजगार के आंकड़े के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
यही बात राज्य के बाहर चलाए जा रहे निवेश अभियानों पर भी लागू होती है। किसी निवेश प्रस्ताव का वास्तविक आर्थिक प्रभाव तब सामने आता है, जब परियोजना जमीन पर उतरती है, उत्पादन शुरू होता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होता है।
पर्यटन में धार्मिक स्थलों से आगे बढ़ने की कोशिश

ओडिशा की पर्यटन रणनीति भी केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं है। पुरी, कोणार्क और भुवनेश्वर जैसे प्रमुख स्थलों के साथ राज्य जंगल, समुद्र तट, वन्यजीव, ऐतिहासिक विरासत और आदिवासी संस्कृति को भी पर्यटन के दायरे में लाने की कोशिश कर रहा है।
पर्यटन विभाग की समीक्षा बैठकों में पर्यटक सुविधाओं, डेस्टिनेशन डेवलपमेंट और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया है। मई 2026 में प्रभाती परिडा ने धौली क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं और ईवी आधारित स्थानीय परिवहन से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा की थी।
कनेक्टिविटी भी इस तस्वीर का अहम हिस्सा है। केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में रameshwar–Paradeep Coastal Highway परियोजना की जानकारी दी थी। 160.18 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर की लागत ₹8,300.79 करोड़ बताई गई है और इसका उद्देश्य तटीय ओडिशा के धार्मिक, पर्यटन और आर्थिक केंद्रों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करना है।
बांस और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा
मिशन शक्ति के तहत महिलाओं को स्थानीय संसाधनों पर आधारित कारोबार से जोड़ने पर भी जोर है। ओडिशा सरकार की जानकारी में बांस उत्पाद, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि, पशुपालन और कई अन्य गतिविधियों को महिला SHG की आजीविका गतिविधियों में शामिल किया गया है।
इस मॉडल की खासियत यह है कि महिला समूहों को केवल सरकारी सहायता लेने वाले समूह के बजाय उत्पादन और कारोबार की श्रृंखला में भागीदार बनाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इसका वास्तविक असर आय में कितनी वृद्धि करता है, इसे जिले और समूह स्तर के आंकड़ों से लगातार परखा जाना जरूरी है।
मानव तस्करी पर कार्रवाई की चुनौती
ओडिशा में महिला सुरक्षा और मानव तस्करी का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में केवल बचाव अभियान पर्याप्त नहीं होता। रोजगार, शिक्षा, स्थानीय आजीविका और पीड़ितों के पुनर्वास को भी साथ लेकर चलना पड़ता है।
इसी वजह से महिला सशक्तिकरण को आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़कर देखने की जरूरत है। जब महिलाओं के पास स्थानीय स्तर पर आय के अवसर और वित्तीय निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है, तो कमजोर परिस्थितियों में उनकी निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
प्रभाती परिडा का राजनीतिक सफर
प्रभाती परिडा ने 2024 के ओडिशा विधानसभा चुनाव में पुरी जिले की निमापारा सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की। उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार उन्होंने उत्कल विश्वविद्यालय से 1995 में एलएलबी और 2005 में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए किया है तथा 1995 में ओडिशा हाई कोर्ट में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया था। उनके पति श्याम सुंदर नायक पूर्व सरकारी कर्मचारी रहे हैं।
उनकी वर्तमान भूमिका को देखते हुए महिला एवं बाल विकास, मिशन शक्ति और पर्यटन से जुड़े फैसलों में उनकी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। हालांकि, किसी योजना की सफलता का आकलन केवल राजनीतिक दावों से नहीं, बल्कि लाभार्थियों, रोजगार, आय, परियोजना क्रियान्वयन और क्षेत्रवार आंकड़ों के आधार पर करना अधिक उपयोगी होगा।
आगे की असली परीक्षा जमीन पर
ओडिशा में महिला SHG नेटवर्क, सुभद्रा योजना, आंगनवाड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन परियोजनाओं और औद्योगिक निवेश को लेकर गतिविधियां बढ़ी हैं। लेकिन इन पहलों की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि योजनाओं का लाभ कितनी प्रभावी तरीके से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक पहुंचता है।
इसी तरह बड़े निवेश प्रस्तावों को वास्तविक कारखानों और रोजगार में बदलना, पर्यटन को स्थानीय कारोबार से जोड़ना और महिलाओं की आय में स्थायी वृद्धि करना आने वाले समय की महत्वपूर्ण कसौटियां होंगी।
ओडिशा की बदलती तस्वीर इसलिए केवल सरकारी योजनाओं की सूची नहीं है। असली बदलाव तब दिखाई देगा, जब इन योजनाओं और निवेशों का असर लोगों की आय, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्थानीय कारोबार और रोजमर्रा की जिंदगी में साफ नजर आए।

ओडिशा की पहली महिला उपमुख्यमंत्री श्रीमती प्रभाती परिडा को दैनिक जलतेदीप और माणक राजस्थानी पत्रिका के प्रबंध सम्पादक दीपक मेहता ने राजस्थानी भाषा की एक मात्र मासिक पत्रिका माणक की प्रति भेंट की।



