निकाय चुनाव में ‘भजनलाल मॉडल’ का डंका, कांग्रेस के गढ़ ढहे, बीजेपी की ऐतिहासिक जीत

राजस्थान के निकाय चुनावों में भाजपा ने अब तक घोषित 303 निकायों में से 200 में अपने प्रमुख बनाकर बढ़त दर्ज की है। पार्टी का प्रदर्शन जोधपुर संभाग में सबसे मजबूत रहा, जहां 41 में से 35 निकायों में बोर्ड बना। भरतपुर, अजमेर, बीकानेर और उदयपुर संभागों में भी भाजपा ने कांग्रेस से अधिक निकायों में सफलता हासिल की है।

  • राजस्थान निकाय चुनाव में चला भजनलाल मॉडल, बीजेपी ने 200 निकायों में रचा इतिहास।
  • जोधपुर संभाग में कांग्रेस का सूपड़ा साफ, बीजेपी ने 87% सीटों पर कब्जा जमाया।
  • मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की जमीनी रणनीति से 9 जिले पूरी तरह कांग्रेस विहीन हुए।

‘Bhajanlal Model’ Makes Waves in Civic Polls :  राजस्थान के निकाय चुनावों में अब तक घोषित नतीजों में भाजपा ने कांग्रेस से ज्यादा निकायों में अपने बोर्ड बनाए हैं। 303 निकायों के उपलब्ध परिणामों के अनुसार भाजपा के 200 और कांग्रेस के 95 निकाय प्रमुख बने हैं। हालांकि कुछ प्रमुख निकायों के परिणाम अभी बाकी हैं, इसलिए अंतिम तस्वीर बाद में पूरी होगी।

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भाजपा के अनुसार, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रत्याशी चयन के लिए सर्वे, टिकट वितरण और चुनाव प्रचार के स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई। पार्टी ने स्थानीय मुद्दों और संगठनात्मक तैयारियों के साथ चुनाव मैदान में उतरने के साथ कई शहरों में रोड शो और जनसंपर्क कार्यक्रमों को भी अभियान का हिस्सा बनाया।

संभागवार आंकड़ों में भाजपा का सबसे अधिक प्रतिशत जोधपुर संभाग में सामने आया। यहां कुल 41 निकायों में से भाजपा ने 35 में बोर्ड बनाया, जबकि कांग्रेस को 5 निकायों में सफलता मिली। इस तरह उपलब्ध परिणामों में भाजपा को 30 निकायों की बढ़त रही। पाली नगर निगम में भाजपा ने निर्दलीयों के समर्थन से बोर्ड बनाया। जोधपुर नगर निगम का परिणाम अभी लंबित है।

भरतपुर संभाग में भाजपा ने 32 में से 24 निकायों में बोर्ड बनाया, जबकि कांग्रेस को 7 निकायों में सफलता मिली। यहां भाजपा की बढ़त 16 निकायों की रही। इसी तरह अजमेर संभाग में 52 निकाय प्रमुख पदों में से भाजपा ने 36 और कांग्रेस ने 14 पर सफलता हासिल की। अजमेर नगर निगम में भाजपा ने निर्दलीयों के समर्थन से महापौर पद हासिल किया।

बीकानेर संभाग में 37 निकायों में से भाजपा ने 24 और कांग्रेस ने 10 में बोर्ड बनाया। यहां भाजपा की बढ़त 14 निकायों की रही। श्रीविजयनगर नगरपालिका का परिणाम अभी आना बाकी है।

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उदयपुर संभाग में भाजपा ने 28 में से 18 निकायों में बोर्ड बनाया, जबकि कांग्रेस 9 निकायों तक सीमित रही। यहां भाजपा को 9 निकायों की बढ़त मिली। कोटा संभाग में 28 में से भाजपा के 15 और कांग्रेस के 10 निकाय प्रमुख बने। कोटा नगर निगम और सुकेत नगर पालिका के परिणाम लंबित हैं।

जयपुर संभाग के 91 शहरी स्थानीय निकायों में भाजपा ने 48 और कांग्रेस ने 40 में सफलता हासिल की। इस आधार पर भाजपा को 8 निकायों की बढ़त है। जयपुर नगर निगम और खाटूश्यामजी नगर पालिका के परिणाम अभी बाकी हैं।

9 जिलों में कांग्रेस का बोर्ड नहीं

उपलब्ध नतीजों में नौ प्रशासनिक जिलों में कांग्रेस किसी भी नगर निकाय में बोर्ड नहीं बना सकी। इनमें बालोतरा, बाड़मेर, ब्यावर, भरतपुर, डीग, डूंगरपुर, कोटा, फलोदी और पाली शामिल हैं। वहीं अजमेर, बांसवाड़ा, जैसलमेर, जालौर, प्रतापगढ़ और सिरोही में कांग्रेस को एक-एक निकाय में सफलता मिली।

प्रदेश स्तर पर उपलब्ध 303 निकायों के आंकड़ों में भाजपा ने 200 और कांग्रेस ने 95 निकायों में प्रमुख बनाए हैं। इस हिसाब से दोनों दलों के बीच 105 निकायों का अंतर है। भाजपा की उपलब्धि करीब 66 प्रतिशत बताई गई है। हालांकि जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम सहित सुकेत, खाटूश्यामजी और श्रीविजयनगर के परिणाम आने के बाद आंकड़ों में बदलाव हो सकता है।

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भाजपा ने इस प्रदर्शन को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व, चुनावी रणनीति और संगठनात्मक समन्वय से जोड़कर देखा है। पार्टी का कहना है कि स्थानीय मुद्दों, सरकार की योजनाओं और बूथ स्तर की तैयारियों को अभियान में प्रमुखता दी गई। मुख्यमंत्री की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में प्रचार और कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय पर भी जोर दिया गया।

इन नतीजों का अंतिम राजनीतिक आकलन हालांकि सभी लंबित निकायों के परिणाम आने के बाद ही किया जा सकेगा। फिलहाल उपलब्ध आंकड़े भाजपा और कांग्रेस के बीच निकाय स्तर पर स्पष्ट अंतर दिखा रहे हैं।

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